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साहित्य

बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में चल रहे सात दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेला का हुआ समापन

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में चल रहे राष्ट्रीय पुस्तक मेला, अखिल भारतीय लेखक शिविर और राष्ट्रीय सेवा योजना के विश्वविद्यालय स्तरीय एकीकरण शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज की हिंदी विभाग की प्रोफेसर रचना विमल ने कहा कि बुंदेलखंड से मेरा खास नाता है। उन्होंने कहा कि उनकी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत महोबा महोत्सव से हुई थी। आज इतने वर्ष बाद वह एक बार फिर झांसी में है। पुस्तकें हमारी सामाजिक चेतना को जागृत करती हैं। तकनीक के युग में व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी ने हर व्यक्ति को प्रोफेसर बना दिया है। यहां हर व्यक्ति अपनी मर्जी से चलना चाह रहा है। इस मर्जी की दुनिया में कोई आपको दिशा दिखाने का काम कर सकता है तो वह है पुस्तकें। जब आप पुस्तक पढ़ते हैं तो तन और मन दोनों में ऊर्जा आती है। पुस्तक पढ़ने से आप कल्पनाओं की नई दुनिया में जा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री रविंद्र शुक्ल ने कहा कि भारत के हर बड़े काव्य ग्रंथ की रचना बुंदेलखंड में ही की गई। युवा पीढ़ी की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने गौरवशाली इतिहास के बारे में जानकारी एकत्रित करे। पुस्तकों से दोस्ती आपको एक बेहतर इंसान बनाती है। झांसी में पुस्तक मेला होना सौभाग्य की बात है। दुनियाभर की रचनाएं यहां युवाओं के लिए उपलब्ध रहती हैं।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तक मेला का आयोजन एक बड़ी उपलब्धि है। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ ही झांसी और आस पास के जिलों के लोगों ने भी इस मेले का लाभ उठाया। सातों दिन यहां पुस्तक प्रेमियों का जमावड़ा लगा रहा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तक मेला और अखिल भारतीय लेखक शिविर का सफल आयोजन हिंदी विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि है। विभाग के अध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी के नेतृत्व में उनकी पूरी टीम ने अथक प्रयास से इस कार्यक्रम को सफल बनाया है। हिंदी विभाग के सभी शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी बधाई के पात्र है।

अतिथियों का स्वागत प्रो. मुन्ना तिवारी और आभार प्रो. पुनीत बिसारिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अचला पांडेय और शोधार्थी शाश्वत सिंह ने किया। इस अवसर पर प्रो. राकेश पांडेय, डॉ. बिपिन प्रसाद, डॉ. प्रेमलता, डॉ. सुनीता वर्मा, डॉ. सुधा दीक्षित, डॉ. पुनीत श्रीवास्तव, डॉ. शैलेंद्र तिवारी, डॉ. द्युती मालिनी, आकांक्षा, अजय समेत कई शिक्षक एवं छात्र छात्राएं मौजूद रहे।

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