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बुन्देलखण्ड के लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने में मिली सफलता : अनुराग शर्मा

झांसी-ललितपुर सीट से सांसद और भाजपा के मौजूदा प्रत्याशी अनुराग शर्मा एक बार फिर लोकसभा के चुनावी रण में उतर चुके हैं। विपक्षी दल अपने तीर-तरकश सजाकर मैदान में हैं। इन सबके बीच हमारे संवाददाता ने विभिन्न मसलों पर उनसे खास बातचीत की और जनता व विपक्ष की ओर से उठने वाले सवाल भी उनके सामने रखें। उन्होंने सभी मसलों पर खुलकर बात की और सवालों के जवाब दिए। 

सवाल – राजनीति में एंट्री की भूमिका किस तरह बनी और सांसद के रूप में पांच वर्ष का समय बीतने के बाद आगामी चुनाव को लेकर किस तरह की तैयारी चल रही है ?

जवाब – भाजपा से जुड़ने का मुख्य कारण यह था कि इस पार्टी का मूल लक्ष्य जनसेवा का है और अंत्योदय की फिलॉसफी है। आखिरी छोर पर खड़ा हुआ इंसान, विशेष तौर से बुन्देलखण्ड में, ऐसे लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने में काफी सफलता मिली है। बहुत अच्छा लगता है कि बहुत सारे क्षेत्रों में बहुत सारे लोगों की मदद कर सके। 
सवाल – इंडिया गठबंधन को एनडीए के सामने कितना चुनौतीपूर्ण मानते हैं आप ?

जवाब – मैं इंडिया गठबन्धन को बहुत ज्यादा चुनौती मानता नहीं हूँ, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, क्योंकि योगी जी की जो कार्यशैली रही है, उसकी वजह से और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो विजन और काम करने का तरीका है, जिससे लोगों के जीवन में इतना बदलाव आया है, उसकी वजह से हमें कोई विशेष चुनौती नहीं दिखती। 

सवाल – पिछले कई चुनाव में बसपा का बड़ा वोट भाजपा की ओर शिफ्ट होता दिखाई दिया है। इस चुनाव में बसपा की भूमिका को आप किस तरह से देखते हैं ? 

जवाब – बहुजन समाज पार्टी अपना निर्णय अपने हिसाब से लेती है लेकिन लोगों का जो रुझान रहा है, बीएसपी के साथ बहुत सारे लोग जुड़ते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। इसके मुख्य रूप से दो कारण रहे हैं। एक कारण यह है कि बीजेपी ने सभी के लिए काम किया है और बीएसपी बहुत सीमित दायरे में काम करती है। भाजपा सारे समाजों को साथ लेकर चलती है। जिन लोगों को कोई भी नहीं पूछता था और जिनकी वजह से बुन्देलखण्ड में हमारी संस्कृति जीवित है, उन शिल्पकारों की मदद करने के लिए कभी बसपा ने कोई काम नहीं किया। इन्हें तीन लाख रुपये तक के लोन के लिए किसी तरह की गारंटी की जरूरत नहीं है। गारंटी के रूप में पीएम मोदी खड़े हुए हैं। ये सौगातें सिर्फ बीजेपी से ही मिली हैं। 

सवाल – अपने कार्यकाल का पांच प्रमुख काम कौन सा मानते हैं आप ?

जवाब – बहुत सारी चीजें सरकार के माध्यम से ही मिल सकती हैं। सरकार के माध्यम से पिछले पांच साल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि हम लोगों ने कोरोना काल में जो काम किया, उससे सैकड़ों लोगों की जान बचाने का काम हुआ। झांसी में एक दिन भी ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी। दिन-रात हम सबने काम किया, सरकार ने बहुत सहयोग किया। चाहे हमें 800 किमी या 1000 किमी दूर से ऑक्सीजन टैंकर लाने पड़े हों, हम लेकर आये। उस समय जब कोई भी निकलने को तैयार नहीं था, मैं अकेला बाजारों में घूमने को तैयार था। इससे लोगों का पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति विश्वास बढ़ाता है।

हमें बीडा की उपलब्धि मिली है। इसके लिए 5000 करोड़ रुपये कैबिनेट से पास भी हो गया है। यह बुन्देलखण्ड के लिए गेम चेंजर है। हम हिंदुस्तान के हृदय में बैठे हैं। हमारे पास दो-चार चीजें ऐसी हैं, जो पूरे देश में कहीं उपलब्ध नहीं है। एक हमारी लोकेशन। दूसरा नार्थ-साउथ-ईस्ट-वेस्ट हाइवेज। तीसरा हमारा रेलवे ट्रैक साउथ को कनेक्ट करता है और हर मेजर पोर्ट को कनेक्ट करता है। चौथा, हम जिस स्थान पर बैठे हैं, उसके 300 या 400 किमी के रेडियस में माल आसानी से भेज सकते हैं। बीडा की वजह से हम वेयर हाउसिंग और मल्टी मॉडल हब की पॉलिसी लेकर आ रहे हैं। उसमें बीडा हमेशा ही सफल रहेगा। बाहर से लोगों को निवेश मिलेगा। 

ललितपुर में कोई भी मेडिकल की फैसिलिटी नहीं थी। प्रदेश को जो 13 मेडिकल कॉलेज मिले हैं, उसमें ललितपुर को पास करवा लिया। वह बनकर तैयार हो गया है। 

ललितपुर में उद्योग कभी नहीं आता था। वहां विशेष रूप से पलायन बहुत होता था। उस पलायन को रोकने के लिए हमने दो बड़ी चीजें करवाने का काम किया है। एक वहां पर बल्क ड्रग पार्क आ रहा है। दूसरा जो वहां से सबसे ज्यादा पलायन करते थे, वे थे हमारे सहरिया लोग। ये पलायन इसलिये शुरू हुआ था क्योंकि पहले की सरकारों ने नीति ऐसी बना दी थी। जितनी हमारी माइंस धौर्रा के पास थीं, वे सब वहां की महावीर नेशनल पार्क में चली गई थीं। यह देखा नहीं गया था कि इसे कितनी दूर तक करना चाहिए। नई पॉलिसी लाकर उन माइंस को धीरे धीरे चालू करवाया। अत्यंत गरीब लोग ही पत्थर का काम कर पाते हैं क्योंकि हाथ का काम है।

बुन्देलखण्ड में पानी की हमेशा से समस्या रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने हर घर जल की सौगात दी है। उसमें भी तीन चीजें हैं। हर घर जल जब उत्तर प्रदेश में चालू हुआ तो बुन्देलखण्ड से ही इसे हमारे मुख्यमंत्री ने शुरू करवाई। दूसरा केन और बेतवा रिवर लिंक जो अटल बिहारी बाजपेयी जी का सपना था, कोई सरकार हिम्मत करके भी उसको हाथ नहीं लगा पा रही थी, उसका भी काम चालू करवा दिया। उसके लिए बजट आवंटन हो गया और खर्च भी होने लगा। बुन्देलखण्ड में हम यह मानकर चलते थे कि एक दूसरे के साथ सहयोग करके काम नहीं कर पाते हैं। किसान न अपना खेत डुबोने देगा, न पानी का स्तर रोकेगा और हमारा भूजल का स्तर देखें तो लगातार गिरता जा रहा है दशकों से। मुझे बहुत खुशी है कि इस बार हम टहरौली में प्रायोगिक तौर पर एक्रीसेट की योजना लेकर आये हैं। टहरौली के पास गांव में हमने पहली बार किसानों से बात करके उनके सहयोग से वहां चेक डैम बनाये और नदियों-नालों को साफ किया। मुझे बताया गया हमारा भूजल स्तर एक साल के भीतर तीस से चालीस फ़ीट उन गांव में बढ़ गया। 

सवाल – कौन सा ऐसा काम रह गया, जो अगली बार मौका मिलने पर आप पूरा करना चाहेंगे ?

जवाब – दो चीजों पर मुझे लगता है कि बुन्देलखण्ड में हम आगे भी काम कर सकते हैं। बुन्देलखण्ड आर्थिक रूप से काफी समय से पिछड़ रहा है। ये जितने भी हम प्रोजेक्ट्स लेकर आ रहे हैं, उनको कराना बेहद जरूरी है। बुन्देलखण्ड की एक बड़ी समस्या यह है कि यहां आबादी कम है, यहां घनी आबादी का क्षेत्र नहीं है। गांव एक दूसरे से दूर-दूर रहते हैं। हमारे बच्चों का स्कूल में ड्राप आउट रेट बहुत अधिक है। सांसद निधि से सबसे पहले मैंने यह काम शुरू किया कि लड़कियों के जिन स्कूलों में शौचालय की व्यवस्था नहीं थी, उन सबमें शौचालय बनवाये। एक बेटी को पढ़ाने का अर्थ होता है आगे के लिए दो परिवारों को शिक्षित करना। इससे बुन्देलखण्ड में बड़ा बदलाव आएगा। हमारी सोच बदलेगी। हमारे लोग बहुत परिश्रमी हैं। हमारे लोग बहुत ईमानदार हैं। केवल शिक्षा के मामले में एक कमी थी। इसमें बेटियों की शिक्षा के लिए पॉलिसी चेंज करके बदलाव यह लाना है कि हर जूनियर स्कूल को हाईस्कूल बनाएं। हाईस्कूल को ऐसा बनाया जाए कि सीनियर लेवल तक बेटियां जा सकें। आप एक ही बार स्कूल में एडमिशन लीजिये और बारहवीं तक बेटी उसी स्कूल में पढ़ाई करे। हर स्कूल में अच्छी शिक्षा की व्यवस्था हो। यह मेरा एक सपना है कि यदि मुझे मौका मिला तो अगले पांच साल में यह काम जरूर करूंगा।

सवाल – विपक्षी दलों के लोग कहते हैं कि आपका पब्लिक से कनेक्ट बहुत कम रहा ?

जवाब – पब्लिक कनेक्ट उनके हिसाब से कम रहा है। उनके कहने के अनुसार तो पहले मैं विदेश में रहता था। मेरे घर में कोई नहीं आ सकता था। आप कभी भी आ जाइये, मेरे घर में हमेशा भीड़ मिलेगी। उन्हें कभी उम्मीद ही नहीं थी कि कभी ऐसा सांसद मिलेगा जो जाकर गांव में काम करेगा। उनको आदत है सिर्फ नेताओं के बीच काम करने की। मैं सिर्फ नेताओं के बीच सीमित नहीं रहा हूँ। मेरा पब्लिक से अलग कनेक्ट है क्योंकि मैं गांव में गया। मैं इतने सारे गांव में गया हूँ, जहाँ के लोग आजादी के 75 साल में कभी अपने सांसद से नहीं मिले थे। उन नेताओं से नहीं मिला हूँ या उन माफियाओं से नहीं मिला हूँ, जिनका कनेक्ट उन आरोप लगाने वालों के साथ है। उनके लिए मेरे दरवाजे बंद रहे हैं। लोगों के लिए मेरे दरवाजे हमेशा खुले रहे हैं। आपको आज तक कभी नहीं मिला होगा कि कोई भूमाफिया या इस तरह के लोग मेरे घर पर कभी बैठे हुए दिखे हों। 

सवाल – बिजनेस जगत के लोग झांसी में निवेश को लेकर किस तरह की राय रखते हैं ? 
जवाब – बिजनेस वाले जो लोग काम करते हैं, उनको दो चीजें चाहिए होती हैं। कोई बिजनेसमैन यह नहीं बोलेगा कि सरकार की सब्सिडी पर फैक्ट्री लगाएगा। इस फील्ड में जो सीरियस लोग काम करते हैं, उन्हें स्थिर नीति की जरूरत होती है। हमारी सरकार ने स्थिरता दी है। दूसरा उन्हें लगता है कि वे किसी भी क्षेत्र में जाएं तो उनका बिजनेस और उनका जानमाल सुरक्षित रहे। आज तक उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए कभी इतने एमओयू साइन नहीं हुए। हमारी सरकार ने लगभग 36 लाख करोड़ के एमओयू साइन किये हैं। इसमें चार लाख करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव बुन्देलखण्ड के लिए है। इसीलिए झांसी में बीडा बनाया जा रहा है।

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