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टी.बी. मुक्त भारत पर एन.एच.एम. द्वारा आयोजित हुआ मण्डलीय सेमिनार

झाँसी 27.02.2024.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा मण्डलीय ईको कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर पर कार्यरत् सी.एच.ओ. के ज्ञानवर्धन हेतु ‘टी.बी.- प्राथमिक उपचार व रोकथाम’ विषय पर वर्चुअल सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार को सम्बोधित करते हुये एम.एल.बी. मेडिकल कॉलेज के टी.बी. एवं चेस्ट डिपार्टमेन्ट के विभागाध्यक्ष डा. मधुरमय शास्त्री ने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में टी.बी. के मरीज अन्य देशों की तुलना में सर्वाधिक हैं वहीं दूसरी ओर इससे होने वाली मौंतों के मामलों में भारत पहले स्थान पर है जोकि एक चिन्ता का विषय है। इसी प्रकार टी.बी. का प्रिवलेंस और मौतों के मामले में भारत की स्थिति चिंताजनक है जिसे व्यापक स्तर पर जागरूकता, समय से स्रीर निंग व नियमित उपचार से देश को टी.बी. मुक्त बनाया जा सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर पर कार्यरत् सी.एच.ओ. मरीजों के समय से उपचार के लिये एक ऐसे सम्पर्क सूत्र हैं जिनके माध्यम से मरीजों में टी.बी. के लक्षणों की प्रारम्भिक पहचान कराते हुये उन्हें समुचित उपचार दिलाया जा सकता है।

भारत में बच्चों में टी.बी. के बामारी के केसस की संख्या लगातार बढ़ रही है इसके लिये यह जरूरी है कि माता-पिता इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे का वजन लगातार तीन माह तक नहीं बढ़े और अन्य कुछ लक्षण दिखाईं दे रहें हो तो वे तुरन्त चिकित्सक से सम्पर्क करें।

डा. शास्त्री ने बताया कि दुनिया में टीबी का हर चौथा नया मरीज भारतीय है, यह एक चिंता का विषय है। मरीजों द्वारा अधूरे उपचार को छोड़ने से भारत में टी.बी. का स्वरूप बदला है जिससे टी.बी. से होने वाली मौतों की मृत्युदर भी बढ़ गयी है। मरीजों को चाहिये कि वे किसी भी दशा में कोर्स पूरा किये बिना दवा खाना बंद न करें। उन्होंने सी.एच.ओ. के इस विषय पर ज्ञानबर्धन के दौरान कहा कि एक बार टी.बी. के मरीज का इलाज प्रारंभ कराना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी उसे दवाओं का पूरा कोर्स करने के लिये प्रेरित करना भी है।

सेमिनार के दौरान एन.एच.एम. के मण्डलीय परियोजना प्रबंधन आनन्द चौबे ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तर्गत विभिन्न बीमारियों के उपचार हेतु सभी हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर पर पर्याप्त दवाईयाँ व सी.एच.ओ. के माध्यम से परामर्श सेवाएँ उपलब्ध हैं। टी.बी. की जाँच के लिये भी सभी हैल्थ एण्ड वेलनेस सेन्टर पर पर्याप्त व्यवस्था तथा सी.एच.ओ. का प्रशिक्षण कराया जा चुका है। टी.बी. के संभावित लक्षणों की स्थिति में जाँच कराया जाना अत्यन्त आवश्यक है। एन.एच.एम. के माध्यम से प्रत्येक मरीज को निक्षय पोषण योजना के तहत रू. 500 प्रतिमाह दिये जाते हैं जिससे कि वे दवाओं के साथ पोषण की पर्याप्त व्यवस्था कर सकें।

सेमिनार में झाँसी मण्डल के तीनों जिलों के लगभग 300 सी.एच.ओ. ने भाग लिया। सेमिनार में सी.एच.ओ. द्वारा उपचार की व्यवस्थाओं के बारे में अनेक प्रश्न पूछे गये जिनका विषय विशेषज्ञ द्वारा उत्तर दिया गया। कार्यक्रम में मो.अतीब, धीरज सिंह चौहान, जय प्रकाश, दीक्षा प्रजापति, कल्याण राजपूत, कृष्णा जयमान, बालाराम, विनायक शुक्ला आदि ने भाग लिया। मगरपुर झाँसी की सी.एच.ओ. अभिलाषा राजू ने केस स्टडी का प्रस्तुतिकरण किया। कार्यक्रम का संचालन गणेश तेनगुरिया व धर्मेन्द्र कुमार ने किया।

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