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उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी ने ठुमरी साम्राज्ञी गिरिजा देवी को झांसी में दी संगीतमयी पुष्पांजलि

झांसी। ठुमरी साम्राज्ञी पद्मविभूषण विदुषी गिरिजा देवी की स्मृति में झांसी के पंडित दीन दयाल उपाध्याय सभागार में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा बुधवार शाम पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में अकादमी के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ धन्नू लाल गौतम विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर पिछले वर्ष के पुष्पांजलि कार्यक्रमों पर आधारित एक डाक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया और इसके बाद ठुमरी गायन से जुड़े कलाकारों ने प्रस्तुतियां दीं।

झांसी की दिवाश्री ने राग बागेश्री में ‘कौन करत तोरी विनती पियरवा, मानो न मानो हमरी बात’ प्रस्तुत किया। झांसी की कल्याणी श्रीवास्तव ने राग मिश्र खमाज में ‘अब न बजाओ श्याम बंसुरिया, व्याकुल भई ब्रज वाम’ गाकर लोगों का मन मोह लिया। रामपुर से आये सखावत हुसैन ने राग पीलू में ‘मैं तो उन्हीं से खेलूंगी होली गुईयां, जिनके बाल है घूंघर वाले सांवरी सांवरी सूरत’ गाया। इंदौर की शोभा चौधरी ने राग मारू बिहाग में ‘मोरे नयनवा तरस गए री, निठुर पिया की बाट तकत’ की प्रस्तुति दी।

पुष्पांजलि कार्यक्रम में झांसी के शास्त्रीय गायक समीर भालेराव ने पद्मविभूषण गिरिजा देवी के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में संस्कार भारती के प्रदेश महामंत्री नरेश अग्रवाल बतौर अतिथि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ नीति शास्त्री ने किया और आयोजन में देवराज चतुर्वेदी ने सहयोग किया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक तरुण राज ने बताया कि पुष्पांजलि कार्यक्रम की श्रृंखला में इस वर्ष इससे पहले मथुरा और वाराणसी में प्रस्तुतियां हो चुकी हैं। आज झांसी में यह विशेष आयोजन किया गया है। इसके बाद मेरठ और लखनऊ में पुष्पांजलि का आयोजन होना है।

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